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digvijaytrivedi


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राष्ट्रीय जल नीति – सरकारी दुस्साहस या बेशर्मी

Posted On: 12 Apr, 2012  
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bravo maricom

Posted On: 22 Sep, 2010  
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बिका न्याय, टूटा विश्वास

Posted On: 16 Aug, 2010  
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Others पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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FIFA 2010 and India

Posted On: 18 Jun, 2010  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

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आपका यह लेख सामान्यजन की भावना का सटीक प्रतिनिधित्व करता है। और  “मेरा कातिल ही मेरा मुंसिफ है. क्या मेरे हक मे फैसला देगा ……” इन पंक्तियों के माध्यम से गागर में सागर भरने का काम किया है। नेता यानि मार्गदर्शक, परन्तू दुर्भाग्य से हम अपने पथभ्रष्टक नेताओं के साये में जी रहे हैं। विगत दिनों में सरकार ने लोकपाल बिल को लेकर अपनी कुटिल मानसिकता का परिचय देकर देश के सजग नागरिकों को हतप्रभ कर दिया है। निर्णायक प्रश्न यह है कि देश में ऎसे कितने सजग लोग हैं और जो विषय को कुछ ही समय उपरान्त अपनी मानसिक पटल से धुमिल होने नही देते। ये विशेष वर्ग ही भ्रष्टाचार को लेकर राजनेताओं की दिशा व दशा तय करने में सक्षम होगा। निःसंदेह, अन्ना आन्दोलन को जनता का ऎतिहासिक समर्थन मिला है, जो सरकार की ओछी प्रतिकि्या के बाद निरन्तर बढ़ ही रहा है। परन्तु इस समर्थक भीड़ के पीछे का सत्य क्या है, ये एक मौलिक प्रश्न है। लोकपाल बिल को लेकर सरकार की हठधर्मिता के पीछे इस सत्य का गणित तो छिपा नही है वरना कुछ भ्रष्ट मंत्रियों को बचाने के लिये आगामी चुनाव दांव में लगा दे, ये समझ से परे है...........सिद्ध तो यही होता है कि ये  दांव तो सोनिया  या राहुल को बचाने के लिये हो सकता है।   

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के द्वारा: digvijaytrivedi digvijaytrivedi

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त्रिवेदी जी आपने बहुत ही हिम्मत से अपने विचार व्यकक्त किये यह आपकी बहादुरी का प्रतीक है। जब उत्तर भारतीयों का मनसे द्वारा उत्पीडन किया जा रहा था उस समय अमिताभ बच्चन अपनी रिवाल्वर अपने आलमारी से निकालकर अपने तकिये के नीचे रखते हैं। भगवान बालाजी के दरवार मे तीन करोड का कंगन चढाते है लेकिन भुख से मर रहे लोगों से कोई सरोकार नही है। मन्दिर मंदिंर घूमकर दर्शन पूजन करके लोगों के बीच कौन्‍ सा वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित कर रहे हैं। मै समक्षती हू कि अमिताभ बच्चन का कोई महत्वपूर्ण सामाजिक सरोकार नही है। रही बात अभिनय की तो अगर अमिताभ बच्चन इतने ही महान कलाकार थे तो उन्हे आज तक आस्कर पुरस्कार क्यो नही मिला।

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सोचता तो हर कोई है लेकिन हर कोई सही नहीं होता है | मै अमिताब का विरोधी नहीं हूँ और ना ही अजय , अमर और बादशा खान का ही प्रशंशक हूँ और ना ही मै कोई राजनितिक पक्षक की बात कर रहा हूँ ....जैसा की आपने कहा है | कोई अच्छा हो सकता है | ये सही है | आपको पाता होगा की ये जनता क्या है | लालू जब रेलमंत्री थे तो रेलवे फायदे में थी तब मिडिया बहुत बड़ाई कर रही थी |लेकिन जब ममता मंत्री बनी तो मिडिया ने लालू के खिलाफ श्वेत पत्र की बात को भी छपी थी | उसी लालू को एक बार मिडिया सही साबित करती है और दूसरी बार गलत | मै आप को कितने उदाहरन दू | ये लालू सिर्फ उदाहरन है | यही बात अमिताभ के साथ भी है | जहाँ तक जनता की बात तो यही जनता लालू जैसो को भी चुनती है | तो अमिताभ कौन को भी उसी जनता ने हीरो बना दिया | अमिताभ अच्छा है लेकिन किसी की अंध भक्ति अच्छी नहीं है | जहाँ तक बात है बादशाह खान ने अमिताब की बड़ाई की है , ये तो खान का बड़प्पन है | आप की लिखावट के अनुसार जो कुछ भी हमने लिखा है , त्रिवेदी जी ने कहा है गलत नहीं है | आपने हमारी और त्रिवेदी जी की सोच का जो आकलन किया है , उससे हमारी नहीं आपकी सोच पाता चलती है | आप अमिताभ के अंध भक्त है तो ठीक है | मैंने सोचा की आप एक आलोचक , समालोचक या फिर एक टिप्पणीकार होगें सो मैंने लिख दिया | आपको और आपके अमिताभ प्रेम को मैंने दुःख पहुचाया है , तो मै इसके लिए माफ़ी चाहता हूँ | आपको दुःख पहुचाने के लिए माफ़ी चाहता हूँ , क्योकि प्रेमियों और भक्तों को दुःख नहीं पहुचना चाहिए | मगर ये गलती मुझ नादान से हो गयी है | इसके लिए मै माफ़ी चाहता हूँ |

के द्वारा:

रजनीकांत जी ..बेहतर होगा की आप किसी की सोच का विश्लेषण करने की जगह अपनी समझ का विश्लेषण करे ... यहाँ तालिबानीकरण की बात ही ये बताने के लिए बहुत है की आप त्रिवेदी जी ..और ऐसे कई आलोचकों की सोच कांग्रेस के उन चारण परंपरा के लोगो से मिलती जुलती है जो बस मैडम और युवराज की चमचागिरी करने के लिए और उनकी निगाह में उठने के लिए अमिताभ का नाम आते ही टूट पड़ते है विरोध में ... अगर आपलोगों को अमिताभ की एक्टिंग उनके सामाजिक काम ...या उनमे कोई विशेषता ही नहीं दिखाई देती है तो फिर ये तो समझ की ही बात है .... क्योकि आपलोगों के हिसाब से करोणों लोग बेवक़ूफ़ है और आप लोग ज्यादा समझदार .... वह क्या बात है अगर कोई वो बात रखता है जो पूरी दुनिया को दिखती है तो उसके विचार तालिबानी हो गए.... अगर आप मुझे या मेरे जैसे करोणों लोगो को अंध भक्त मानते है तो आपको कुछ भी मानने का अधिकार है इससे सत्य पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा....लेकिन बेहतर होगा की किसी मुद्दे को समग्रता से समझे ....

के द्वारा: NIKHIL PANDEY NIKHIL PANDEY

रजनी जी आपको स्पष्ट रूप से बताना चाहूँगा की मै अमिताभ का अँधा भक्त नहीं हु और अगर आपको ये लगता है तो इसमें मै कुछ नहीं कर सकता क्योकि ये आपकी बुद्धि और समझ का मामला है . बिना समग्रता में सोचे मै बाते नहीं करता क्योकि ब्लॉग का मतलब भाषणबाजी नहीं होती.. कौन सा प्रदेश अपराधियों का अखाडा नहीं है श्रीमान जब संसद में और विधान सभाओ में अपराधियों का प्रतिशत लगातार बढ़ता ही जा रहा है तो किस प्रदेश को आप अपराधमुक्त कह सकते है...../ आमिर ,अजय और शाहरुख़ खान की तुलना अगर आप अमिताभ से कर रहे है तो फिर मै कोई कमेन्ट नहीं कर सकता क्योकि ये आपकी समझ की बात है इस्पे तर्क नहीं हो सकता .... बात ये हो रही है की त्रिवेदी जी ने एकतरफा आलोचना करने के मकसद से अमिताभ के बारे में जो जी में आया लिख दिया ..आलोचना बुरी नहीं होती मगर आप तथ्य तो ऐसे दो .... आपको क्या सारे लोग बेवक़ूफ़ दीखते है की आपने ऐसे व्यक्ति के बारे में जो जी में आया लिख दिया जिसकी कला और बौधिक क्षमता और सामाजिक कार्यो को सबलोग स्वयं देख रहे है... हास्यास्पद है ... ये.. मीडिया आपको और मुझे भगवान् क्यों नहीं बन देती....जनाब आजकी मीडिया बाजारवाद की गुलाम है ये उसका ही प्रयोग करती है जो उसे धन और टी आर. पि दिलाये और अमिताभ ऐसी ही शक्शियत है इस देश की जनता अमिताभ को पुजती है इस लिए मीडिया ने उन्हें सर आँखों पर बैठाया है .. याकि जब अमिताभ की खबरे टीवी पे आये तो सारा काम काज छोरकर हम उनके चैनल को देखे .. कमाल की बात ये है की जिस तरह से त्रिवेदी जी ने अमिताभ की अभिनय क्षमता पर सवाल उठाये वे ये सिद्ध करते है की एक समीक्षक के रूप में त्रिवेदी जी असफल ही रहे... वे तो इस तरह से लिख बैठे मानो तुषार कपूर और फरदीन खान के बारे में लिख रहे हो......... जिसकी प्रशंशा स्वयं उसके प्रतिद्वंदी करते हो और जो अंतर्राष्ट्रीय हस्ती हो उसकी प्रसिधी को मात्र मीडिया की दें कह देना और उसके पुरे जीवन की उपलब्धियों पर प्रश्न चिन्ह लगा देना कौन सी बौद्धिकता है ? और अगर उनका प्रतिकार हो तो आपको अंध भक्ति लगती है .. अगर लगती है तो इससे अमिताभ पर कोई फर्क नहीं पड़ता वे अपना कम करते रहेंगे... और उनके आलोचक बोलते रहेंगे........... मगर हा............. उनके प्रशंशक(अंध भक्त भी कह सकते है ) ऐसे ही बढ़ते रहेंगे.. क्योकि लाइन तो वही से शुरू होगी जहा अमिताभ खड़े होंगे .......

के द्वारा: NIKHIL PANDEY NIKHIL PANDEY

निखिल पाण्डेय आप अमिताभ बच्चन के प्रशंक है तो ठीक , लेकिन अगर अंध भक्त है तो गलत और बुद्धि हीनता है | अमिताभ ने बहुत सोसल कम बिना किसी फीस के किया है | सेसा करने वाले अमिताभ के अलावा भी बहुत लोग है | लेकिन इसी अमिताभ ने उत्तर प्रदेश में समाज को गुमराह करने का भी कम किया ---- \" यु. पी. में दम है , क्योकि जुर्म यहाँ कम है \" यह अमृत वाणी अमिताभ ने मुलायम के जंगल राज में कही थी , जब कि पूरा प्रदेश अपराधियों का अखाडा बना था | लगता है कि निखिल ,कुशल , राज कमल , विराज सिन्हा ही बुद्धि मन है ........और त्रिवेदी जी ही गलत है | मुझें लगता है कि आप अंध भक्त है | यदि सामाजिक फायदा और अमिताभ को देखें इनसे अच्छे अमीर , अजय , बादशाह खान है |

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महोदय ,मुझे ये तो नहीं पता की आप किन पूर्वाग्रहों में फसे है लेकिन आपने जितनी बाते और उदाहरण दिए है वे यह साबित करते है की आप ने एकतरफा आलोचना करने की बात मन में सोचकर ही लिखना शुरू कर दिया और वो भी बिना समग्र समीक्षा किये. अमिताभ आज जिस मुकाम पर है वो जगह उन्हें देने का श्रेया कुछ विचारक कभी तो मीडिया को देते तो कभी उनके राजनीतिक आर्थिक सहयोगियों को... आपको ये पता होना चाहिए की अमिताभ के बाद के जो अभिनेता है उनपर राजनैतिक और व्यावसायिक निवेश उनसे कही ज्यादा हुआ है तब उन्हें ये मुकाम मिला है चाहे शाहरुख़ हो या ऋतिक और उनके साथ सबसे बड़ा लाभ ये है की वे आज के जबरदस्त स्पेशल इफेक्ट से भरी फिल्मो के नायक है जहा अभिनय क्षमता कम और बाकि इफेक्ट्स में ज्यादा खर्च आता है ... जो आज के दर्शको को ज्यादा खीचता है उस समय की सेंसुअलिटी की जगह आज अश्लीलता दर्शक ज्यादा देखना पसंद करते है .. अमिताभ ने अपनी जगह सिर्फ अपनी अभिनय क्षमता से बनाई है , अमिताभ बहुत पहले ही जिस मुकाम को प् चुके थे आज भी कोई भी उसके आसपास भी नहीं है अमिताभ टी आर पि और पुरस्कारों की सीमा से ऊपर है ... अमिताब से पहले के जिन कलाकारों की बात आप ने की कम से कम आप ने एकबार तुलनात्मक अध्यन तो कर लिया होता राजकपूर से लेकर राजेश खन्ना तक जिनका भी आपने नाम लिया है वे सभी अपने फन के बेजोड़ अभिनेता है इसमें कोई दो राय नहीं है लेकिन वे सभी अभिनय की एक विशिष्ट विधा तक ही सीमित है ..जबकि अमिताभ अभिनय की har विधा में विशिष्ट है यही वजह है की जब सदी का महानायक चुनने की बात होती है तो एकमात्र अमिताभ का नाम लिया जाता है और ये जगह उन्हें मीडिया या उनके निवेशको ने नहीं दी है बल्कि दुनिया भर में उनके करोणों प्रशंषको ने दी है जिन्होंने राजकपूर से लेकर शाहरुख़ खान और ऋतिक तक सभी को देखा है ... आपके हिसाब से वे करोणों लोग मुर्ख और बुद्धि हीन है.... और आपने ये कैसे कह दिया की अमिताभ से कोई सामाजिक सांस्कृतिक फैयदा नहीं हुआ .... नेत्रदान पोलियो अभियान , सफाई अभियान ऐसे कितने सरकारी और स्थानीय कार्यक्रम है जिनमे वे बिना कोई शुल्क लिए आगे बढ़कर मदद करते है ..आपको जानकारी नहीं हो तो कृपा करके आप पता करे.... प्राकृतिक आपदाओं के समय अमिताभ प्रभावित क्षेत्र के लोगो की सहायता बढचढ कर करते है...और इतनी उचाई पर पहुचकर भी उनका सौम्य और शांत व्यवहार लोगो को हैरान करता है... आजतक किसी निर्देशक ने ये ये शिकायत नहीं की की अमिताभ स्टारडम दिखाते है जबकि आजके लगभग हर नए अभिनेता से निर्देशकों को यही शिकायत रहती है...जो फिल्मे उनके व्यक्तित्व को नहीं जचती उन्हें उन्ह्पने स्वीकार भी किया...आपको अमिताभ पर कोई अच्छा गाना ही नहीं सुनी दिया ताज्जुब है ... कभी कभी , डान. अभिमान, सिलसिला ,ऐसी कितनी फिल्मे है जिनके गाने जबरदस्त है...आज भी लोगो क जुबान पे है ..... या तो आपकी समझ में कमी है क्योकि आपने उन करोनो लोगो को एक ब्लॉग में मुर्ख ठहरा दिया है जो अमिताभ को सदी का महनायक बना चुके है .....या तो आपको अमिताभ से कोई समस्या है ...अन्यथा अमिताभ की अभिनय प्रतिभा तो उनके दुश्मन भी मानते है ...........

के द्वारा: NIKHIL PANDEY NIKHIL PANDEY




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